Monday, November 30, 2009

तन्हाई

कैसी है ये तन्हाई
आज फिर से जो तेरी याद आई
जिंदगी की भीड़ में चल रहा हूँ अकेला
ना मालुम कहाँ है मंजिल..बस चल पड़ा अलबेला
खोज रहा हूँ जिंदगी के अँधेरे में इक रौशनी
काश कोई आये और कहे, "हाँ मैं ही हूँ तुम्हारे लिए बनी"
काफी ख्याली है मगर अगर से ख्वाब सच हुआ
इश्क की ताकत को फिर से मान जाएगा विपल दुआ

काश...

रूठो ना हमसे ये दिल बैठ जाता है
तुमसे बात किये बिना ये दिल ना रह पाता है
काश की तुम मुझे अपना लेती
और अपने सारे गम मुझे दे देती
अब तुम्हारे ये अश्क देखे नहीं जाते
काश की हम तुमसे कभी ये बात कह पाते
अब तो लगता है दूर है मंजिल, ना है कोई किनारा
कह रहा है ये तनहा दिल, ना है कोई तुमसे प्यारा
आज भी अगर मिल जाओ तुम दो पल
अपनी जान तक दे देगा विपल

जाने का गम

आज उदास हूँ मैं फिर से, याद जो तेरी आई

एक तू ही है जो जाने के बाद नहीं आई

क्या क्या सोचा था जब साथ थे हम

लेकिन आज हाथ में रम आँखें नम और सिर्फ गम

बातों में तेरी डूब जाने का इक अलग ही था मज़ा

अब तो तेरे बिन बात करना ही है इक सज़ा

ऐसी भी क्या चाहत थी मेरी जो तुमने नकार दी

खैर खुश हूँ मैं अगर तुमने अपनी जिंदगी संवार ली

कभी फुर्सत मिले तो हमें भी याद करना दो पल

बस इसी में ही अपनी जीत समझ लेगा विपल