आज उदास हूँ मैं फिर से, याद जो तेरी आई
एक तू ही है जो जाने के बाद नहीं आई
क्या क्या सोचा था जब साथ थे हम
लेकिन आज हाथ में रम आँखें नम और सिर्फ गम
बातों में तेरी डूब जाने का इक अलग ही था मज़ा
अब तो तेरे बिन बात करना ही है इक सज़ा
ऐसी भी क्या चाहत थी मेरी जो तुमने नकार दी
खैर खुश हूँ मैं अगर तुमने अपनी जिंदगी संवार ली
कभी फुर्सत मिले तो हमें भी याद करना दो पल
बस इसी में ही अपनी जीत समझ लेगा विपल
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