Monday, November 30, 2009

तन्हाई

कैसी है ये तन्हाई
आज फिर से जो तेरी याद आई
जिंदगी की भीड़ में चल रहा हूँ अकेला
ना मालुम कहाँ है मंजिल..बस चल पड़ा अलबेला
खोज रहा हूँ जिंदगी के अँधेरे में इक रौशनी
काश कोई आये और कहे, "हाँ मैं ही हूँ तुम्हारे लिए बनी"
काफी ख्याली है मगर अगर से ख्वाब सच हुआ
इश्क की ताकत को फिर से मान जाएगा विपल दुआ

3 comments:

  1. kya baat hai...reee..hidden talent hai tu to

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  2. VIPAL TERI DUA JARUR KAAM AAYEGI…
    USME AUR BHI BAHUT DUAON KI TAKAT MIL JAYEGI…
    HOGA TERI JINDAGI ME BHI SAWERA…..
    AKELA NAHI HAI HUM DOST DENGE SATH TERA…
    KABHI AAS PAS MUD KAR TO DEKHA HOTA….
    SHAYAD FIR KHUDKO AKELA NAHI KAHA HOTA….
    Dost:)

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