सब कहते हैं कितना खुश हूँ मैं
सिर्फ मैं ही जानता हूँ कितना लाचार हूँ मैं
चाह कर भी इज़हार कर नहीं पाता
ये दिल उसे दिया भी नहीं जाता
मालुम है दिल मेरा ही टूटना है
और फिर से दर्द मुझे ही होना है
काश की वो समझ पाती की मैं उसे चाहता हूँ
दिल के हर कोने में उसे ही ढूंढता हूँ
जाने कब पूरा होगा मेरा ये सपना
कब वो भी मानेगी हमें हमसफ़र अपना
सुना है मीठा होता है सब्र का फल
बस इसी उम्मीद पर दिन काट रहा है विपल
Sunday, December 27, 2009
Tuesday, December 1, 2009
इंतज़ार..
कोशिश तो बहुत की मगर बढ़ ही गई दूरियां
पर इसमें हमारी भी थी कुछ मजबूरियां
हमने इज़हार तो किया
मगर उन्होंने स्वीकार न किया
उन्होंने पीछे मुड़ कर भी ना देखा
की कैसे भुला रहे हैं हम अपने गम को
बहुत कोशिश की मगर भुला ना पाए
जितनी कोशिश करी वो और भी याद आये
अब बदल ही गया है हमारी जिंदगी का पैमाना
ना कोई ख़ुशी है ना कोई फ़साना
अभी भी इंतज़ार है उनके आने का
खुशियाँ और तरंग साथ लाने का
इसी उम्मीद पर जी रहे हैं हम
और ना तडपाओ अब आ भी जाओ सनम...
पर इसमें हमारी भी थी कुछ मजबूरियां
हमने इज़हार तो किया
मगर उन्होंने स्वीकार न किया
उन्होंने पीछे मुड़ कर भी ना देखा
की कैसे भुला रहे हैं हम अपने गम को
बहुत कोशिश की मगर भुला ना पाए
जितनी कोशिश करी वो और भी याद आये
अब बदल ही गया है हमारी जिंदगी का पैमाना
ना कोई ख़ुशी है ना कोई फ़साना
अभी भी इंतज़ार है उनके आने का
खुशियाँ और तरंग साथ लाने का
इसी उम्मीद पर जी रहे हैं हम
और ना तडपाओ अब आ भी जाओ सनम...
इश्क का इज़हार..
जब किसी से कुछ कहना होता है
तो ऐसा क्यूँ होता है
दिल हो जाता है बेखबर और बेकरार
नज़र आता है तो बस प्यार ही प्यार
दिल को बस एक ही आस रहती है
लेकिन जुबां कुछ कह ना पाती है
रोज़ ही रोज़ एक दर्द सा उठता है
किसी के ख्यालों में फिर खो जाता है
अब क्या हाल सुनाऊ अपने दर्द-ए दिल का
मुझे इंतज़ार है मेरी मंजिल का
और मेरी मंजिल सामने ही है
बस इंतज़ार है तो उसकी हाँ का
तो ऐसा क्यूँ होता है
दिल हो जाता है बेखबर और बेकरार
नज़र आता है तो बस प्यार ही प्यार
दिल को बस एक ही आस रहती है
लेकिन जुबां कुछ कह ना पाती है
रोज़ ही रोज़ एक दर्द सा उठता है
किसी के ख्यालों में फिर खो जाता है
अब क्या हाल सुनाऊ अपने दर्द-ए दिल का
मुझे इंतज़ार है मेरी मंजिल का
और मेरी मंजिल सामने ही है
बस इंतज़ार है तो उसकी हाँ का
वो लम्हे...
याद आते हैं वो लम्हे
जब देखा करते थे चुप-2 के तुम्हे
तुम्हारी एक झलक पाने को लालायित रहते थे हम
पर अपनी इच्छा ज़ाहिर करने में डरते थे हम
समय गुज़रता गया
ये दिल और भी धड़कता गया
फिर एक दिन समां आया और हमने सब कुछ बयां कर दिया
पर तुम्हारा जवाब सुन-ने के बाद ठहर सा गया जिया
दिल को एक गहरा सदमा लगा
क्यूंकि पहली बार जिस-से प्यार किया
उसने हमें स्वीकार ना किया
फिर सोचा अब नहीं मिलूँगा तुमसे
पर रहा नहीं जाता इस बेचारे दिल से
दिल तड़प रहा है मेरा
पर उम्मीद है जल्द ही होगा सवेरा
मैं इस सुबह का इंतज़ार करूँगा
वर्ना सारी उम्र दर्द-ए दिल सहूंगा
जब देखा करते थे चुप-2 के तुम्हे
तुम्हारी एक झलक पाने को लालायित रहते थे हम
पर अपनी इच्छा ज़ाहिर करने में डरते थे हम
समय गुज़रता गया
ये दिल और भी धड़कता गया
फिर एक दिन समां आया और हमने सब कुछ बयां कर दिया
पर तुम्हारा जवाब सुन-ने के बाद ठहर सा गया जिया
दिल को एक गहरा सदमा लगा
क्यूंकि पहली बार जिस-से प्यार किया
उसने हमें स्वीकार ना किया
फिर सोचा अब नहीं मिलूँगा तुमसे
पर रहा नहीं जाता इस बेचारे दिल से
दिल तड़प रहा है मेरा
पर उम्मीद है जल्द ही होगा सवेरा
मैं इस सुबह का इंतज़ार करूँगा
वर्ना सारी उम्र दर्द-ए दिल सहूंगा
Monday, November 30, 2009
तन्हाई
कैसी है ये तन्हाई
आज फिर से जो तेरी याद आई
जिंदगी की भीड़ में चल रहा हूँ अकेला
ना मालुम कहाँ है मंजिल..बस चल पड़ा अलबेला
खोज रहा हूँ जिंदगी के अँधेरे में इक रौशनी
काश कोई आये और कहे, "हाँ मैं ही हूँ तुम्हारे लिए बनी"
काफी ख्याली है मगर अगर से ख्वाब सच हुआ
इश्क की ताकत को फिर से मान जाएगा विपल दुआ
आज फिर से जो तेरी याद आई
जिंदगी की भीड़ में चल रहा हूँ अकेला
ना मालुम कहाँ है मंजिल..बस चल पड़ा अलबेला
खोज रहा हूँ जिंदगी के अँधेरे में इक रौशनी
काश कोई आये और कहे, "हाँ मैं ही हूँ तुम्हारे लिए बनी"
काफी ख्याली है मगर अगर से ख्वाब सच हुआ
इश्क की ताकत को फिर से मान जाएगा विपल दुआ
काश...
रूठो ना हमसे ये दिल बैठ जाता है
तुमसे बात किये बिना ये दिल ना रह पाता है
काश की तुम मुझे अपना लेती
और अपने सारे गम मुझे दे देती
अब तुम्हारे ये अश्क देखे नहीं जाते
काश की हम तुमसे कभी ये बात कह पाते
अब तो लगता है दूर है मंजिल, ना है कोई किनारा
कह रहा है ये तनहा दिल, ना है कोई तुमसे प्यारा
आज भी अगर मिल जाओ तुम दो पल
अपनी जान तक दे देगा विपल
तुमसे बात किये बिना ये दिल ना रह पाता है
काश की तुम मुझे अपना लेती
और अपने सारे गम मुझे दे देती
अब तुम्हारे ये अश्क देखे नहीं जाते
काश की हम तुमसे कभी ये बात कह पाते
अब तो लगता है दूर है मंजिल, ना है कोई किनारा
कह रहा है ये तनहा दिल, ना है कोई तुमसे प्यारा
आज भी अगर मिल जाओ तुम दो पल
अपनी जान तक दे देगा विपल
जाने का गम
आज उदास हूँ मैं फिर से, याद जो तेरी आई
एक तू ही है जो जाने के बाद नहीं आई
क्या क्या सोचा था जब साथ थे हम
लेकिन आज हाथ में रम आँखें नम और सिर्फ गम
बातों में तेरी डूब जाने का इक अलग ही था मज़ा
अब तो तेरे बिन बात करना ही है इक सज़ा
ऐसी भी क्या चाहत थी मेरी जो तुमने नकार दी
खैर खुश हूँ मैं अगर तुमने अपनी जिंदगी संवार ली
कभी फुर्सत मिले तो हमें भी याद करना दो पल
बस इसी में ही अपनी जीत समझ लेगा विपल
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