Monday, November 30, 2009

काश...

रूठो ना हमसे ये दिल बैठ जाता है
तुमसे बात किये बिना ये दिल ना रह पाता है
काश की तुम मुझे अपना लेती
और अपने सारे गम मुझे दे देती
अब तुम्हारे ये अश्क देखे नहीं जाते
काश की हम तुमसे कभी ये बात कह पाते
अब तो लगता है दूर है मंजिल, ना है कोई किनारा
कह रहा है ये तनहा दिल, ना है कोई तुमसे प्यारा
आज भी अगर मिल जाओ तुम दो पल
अपनी जान तक दे देगा विपल

No comments:

Post a Comment