याद आते हैं वो लम्हे
जब देखा करते थे चुप-2 के तुम्हे
तुम्हारी एक झलक पाने को लालायित रहते थे हम
पर अपनी इच्छा ज़ाहिर करने में डरते थे हम
समय गुज़रता गया
ये दिल और भी धड़कता गया
फिर एक दिन समां आया और हमने सब कुछ बयां कर दिया
पर तुम्हारा जवाब सुन-ने के बाद ठहर सा गया जिया
दिल को एक गहरा सदमा लगा
क्यूंकि पहली बार जिस-से प्यार किया
उसने हमें स्वीकार ना किया
फिर सोचा अब नहीं मिलूँगा तुमसे
पर रहा नहीं जाता इस बेचारे दिल से
दिल तड़प रहा है मेरा
पर उम्मीद है जल्द ही होगा सवेरा
मैं इस सुबह का इंतज़ार करूँगा
वर्ना सारी उम्र दर्द-ए दिल सहूंगा
No comments:
Post a Comment