जब किसी से कुछ कहना होता है
तो ऐसा क्यूँ होता है
दिल हो जाता है बेखबर और बेकरार
नज़र आता है तो बस प्यार ही प्यार
दिल को बस एक ही आस रहती है
लेकिन जुबां कुछ कह ना पाती है
रोज़ ही रोज़ एक दर्द सा उठता है
किसी के ख्यालों में फिर खो जाता है
अब क्या हाल सुनाऊ अपने दर्द-ए दिल का
मुझे इंतज़ार है मेरी मंजिल का
और मेरी मंजिल सामने ही है
बस इंतज़ार है तो उसकी हाँ का
SACHA PYAR WAHI JO NAJRON KI BAAT SAKJHE….
ReplyDeleteBINA KISI SHART KE TUMHE KHUDA KI TARAH POOJE…
JO TUMHARE LIYE BANA HOGA WO TUMHE JARUR MILEGA…
FIR HI TO CHAHAT KA PHOOL KHILEGA….
DIL KO HUMESHA SAAF RAKHNA… JANE KAB KYA HO JAYE
SHAYAD WO KOI KAHIN BHI MIL JAYE
IJHAAR BHI HOGA IKRAAR BHI HOGA
BAS TAB YE INTAZAR NA HOGA…..
Dost:)